जनपद में बारिश अभी अभी थमी है : सुधांशु फिरदौस
कविता / PoetryArt: Samia Singh अन्दर या बाहर विरह की इस अंधेरी रात में अब तो जुगनुओं ने भी रास्ता दिखाने से इनकार कर दिया है मंजिल बहुत दूर है और आवारा सड़कें मुझे कब की रौंद चुकी हैं कड़कती हड्डियों का दर्द, ज़र्द त्वचा की सारी चमक और जमाने भर की हैरत अपने आँखों में समेट घर की दहलीज़ पर पशोपेश में बैठा हूँ कि तुम्हारा इंतज़ार किस ओर मुँह कर के करूँ अन्दर या […]