आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

All entries by this author

एक फूल एमेली के लिए: भूतनाथ

कथा / Fiction

(A Tribute to William Faulkner) आषाढ़ का पहला दिन था. सारंग अपनी छुट्टियों के आखिरी रविवार को घर पर बैठ कर बरबाद नहीं करना चाहता था. उसके कॉलेज का आखिरी साल शुरू होने ही वाला था. कुछ दिन की छुट्टियाँ थी, तो फिलहाल घर आ गया था. टीवी देखने और कंप्यूटर पर गेम खेलने के […]



दोहरे मरण की पहचान: कृष्णमोहन झा

कथेतर / Non-Fiction

कवि की अमरता ग़लतफ़हमी पर निर्भर करती है. जिस कवि में ग़लत समझे जाने का जितना अधिक सामर्थ्य होता है वह उतना ही दीर्घ-जीवी होता है. (विजयदेवनारायण साही)   मेरे सारे शब्द प्यार के किसी दूर विगता के जूठे : तुम्हें मनाने हाय कहाँ से ले आऊँ मैं भाव अनूठे? तुम देती हो अनुकम्पा से मैं […]



Possessed Idiots and Deadly Demons: Abhay K

कविता / Poetry

Dostoevsky Harrowing prophet, impassioned, irrational sick and spiteful how could you be otherwise your father murdered by his own serfs you and your Petrashevskian friends arrested for treason without rhyme or reason sentenced to death by the deadly bullets of the firing squad miraculously rescued seconds before triggers were to be pulled shipped off to […]



Tension as a Bridge towards Release: Ajñeya’s Poem “Nāc”[i] – Nicola Pozza

कथेतर / Non-Fiction

  सच्चा सम्पूर्ण निश्छाय कालातीत शुद्ध क्षण वही होगा जिस में न स्मृति का संस्पर्श, न आकांक्षा का, और न तनाव का – ऐसा ही क्षण (मिले तो) जीवन्मुक्ति का क्षण होगा… (Ajñeya, Bhavantī, Rājpāl & Sons, 1989 [1971]: 146-47) “The true, complete, shadowless, timeless, pure instant will be one which is untouched by memory, […]



अथ आडंबर: आशुतोष भारद्वाज

कथेतर / Non-Fiction

मतियाया  सागर लहराया . तरंग की पंखयुक्त वीणा पर पवन से भर उमंग से गाया . फेन-झालरदार मखमली चादर पर मचलती किरण-अप्सराएँ भारहीन पैरों से थिरकीं — जल पर आलते की छाप छोड़ पल-पल बदलती . दूर धुँधला किनारा झूम-झूम आया, डगमगाया किया . मेरे भीतर जागा दाता बोला : लो, यह सागर मैंने तुम्हें दिया […]



नए कवि के सम्मुख अज्ञेय: महेश वर्मा

कथेतर / Non-Fiction

किसी का सत्य था  मैं ने सन्दर्भ में जोड़ दिया. कोई मधु-कोष काट लाया था मैं ने निचोड़ लिया.   किसी की उक्ति में गरिमा थी मैं ने उसे थोड़ा-सा सँवार दिया, किसी की संवेदना में आग का-सा ताप था मैं ने दूर हटते-हटते उसे धिक्कार दिया. कोई हुनरमन्द था : मैं ने देखा और कहा, […]



अप्रकट करुणा के पक्ष में : ही भी किन्तु परन्तु रंगनाथ – हिमांशु पंड्या

कथेतर / Non-Fiction

“कुछ ही दिनों में रंगनाथ को शिवपालगंज के बारे में ऐसा लगने लगा कि महाभारत की तरह, जो कहीं नहीं है वह यहाँ है, और जो यहाँ नहीं है वह कहीं नहीं है. उसे जान पड़ा कि हम भारतवासी एक हैं और हर जगह हमारी बुद्धि एक सी है. उसने देखा कि जिसकी प्रशंसा में […]



बादेनुमा: नैयर मसूद

कथा / Fiction

लिप्यन्तरण-नज़र अब्बास के साथ महेश वर्मा  मछली और परिंदे की मिलीजुली हैयत वाला हमारा बादेनुमा हवा का रूख़ बताना कब का छोड़ चुका था फिर भी मेरे बाप की जिन्दगी तक ये हमारे मकान की छत पर लगा रहा. कभी कभी उनसे कहा जाता कि अब जब ये सही काम नहीं कर रहा है इसे […]



किताबदार: नैयर मसूद

कथा / Fiction

लिप्यान्तरण-नज़र अब्बास के साथ महेश वर्मा किताबख़ाने में किताबों की ख़रीददारी नहीं होती थी लेकिन वहाँ पहले से बहोत किताबें मौजूद थीं. ये किताबें हर किस्म की थीं इसलिये कि जिन लोगों ने अतिये के तौर पर ये किताबें दी थीं उनमें हर मज़ाक के लोग थे. दरअस्ल किसी बड़े वक़्फ़ का किताबख़ाना था. वक़्फ़ […]



मिसकीनों का एहाता: नैयर मसूद

कथा / Fiction

लिप्यान्तरण-नज़र अब्बास के साथ महेश वर्मा घर छोड़ते वक्त मेरी उम्र 22-24 की रही होगी. घर छोड़ने का सबब मेरे बाप का रवैया था. उन्हें शिकायत थी कि मेरी आदतें बिगड़ गर्इ हैं. अब सोचता हूँ तो उनकी शिकायत सही मालूम होती है और वो अपने तौर पर जो मेरी मसरूफियतों का सुराग़ लगाते रहते […]