आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

Archive for April 2008

अप्रैल 2008 / April 2008

सम्पादकीय / Editorial

प्रवेशांक का सम्पादकीय.

Editorial for the inaugural issue.



प्रतिरोध और साहित्य: मदन सोनी

शीर्ष कथा / Lead Feature

हिन्दी साहित्य के विशेष परिप्रेक्ष्य में ‘प्रतिरोध’ को एक मूल्य और अवधारणा के रूप में, साहित्य के साथ उसके रिश्ते के फलन में पढ़ता और समस्याग्रस्त करता यह पाठ मानववाद और उसके समसूत्री विमर्शों की मनुष्य-केन्द्रिकता और ‘नस्लवाद’ को भी चिन्हित करता है.

By problematizing ‘resistance’ as a value and an ideology, and its correspondences with literature, particularly Hindi literature, Madan Soni’s text identifies the homocentricism and ‘racism’ of humanism and the discourses homogeneous to it.



तीन कवि और एक स्त्री-मैक्स ब्रॉड / Three Poets and a Female Max Brod

फीचर्स / Features

हिन्दी कवि-अनुवादक तेजी ग्रोवर इस अंक में तीन कवियों को ‘प्रकाशित’ कर रही हैं सार्वजनिक स्पेस में. ‘प्रकाशन’ और ‘विश्वासघात’ की इस ‘घटना’ पर हमारी संक्षिप्त पूर्व-पीठिका.

Hindi poet and translator Teji Grover ‘unearths’ three poets who have resisted a public identity as poets. We preface this act of publication and betrayal.



1857 And The Indian Intelligentsia: Sudhir Chandra

फीचर्स / Features

Social historian Sudhir Chandra,by reading together and against the generations of the native intelligentsia’s response to the event, problematizes the intellectual after-life of 1857, a chronolgical mark more deeply stamped in Indian collective memory, perhaphs, than 1947, ‘Chhabbis Janvari’ etc.

१८५७ की संघटना के विषय में की गयी ‘नेटिव’ प्रतिक्रियाओं की कई पीढियों को एक दूसरे के साथ और विरुद्ध पढ़ते हुए, समाजेतिहासकार सुधीर चंद्र १८५७ के बौद्धिक उत्तर-जीवन को समस्यांकित करते है. उस १८५७ को जो, संभवतः, सामूहिक भारतीय स्मृति में १९४७, ‘छब्बीस जनवरी’ जैसे अन्य तिथिक्रमिय चिह्नों से अधिक गहरा अंकित है.



Self And Time: Rustam (Singh)

फीचर्स / Features

Minus all kinds of scholarly exhibitionism, Rustam’s text is inquiring at its barest, simplest. Self and time become ideas, much happier in the company of a writing-self that is unimposing to the extent that it is virtually absent (except when it decides to appear in italics).

सभी तरह की अकादमिक प्रदर्शनप्रियता से बचते हुए, रुस्तम का पाठ ‘दार्शनिक अन्वेषण’ की दुसाध्य, दिगंबर-सरलता का एक आकार है. इस पाठ में, ‘आत्म’ और ‘काल’ ‘प्रसन्न’ प्रत्यय हो जाते हैं एक ऐसे लेखकीय-आत्म की संगत में आकर जो अपने को पाठ पर इतना कम आरोपित करता है कि उसके ‘अनुपस्थित’ होने का आभास होता है (सिवाय उन क्षणों के जब वह अपने को इटेलिक्स में प्रकट करता है).



स्वर्ग के द्वार पर लाल चींटियाँ: अनिरुद्ध उमट

कथा / Fiction

हिन्दी कथाकार और कवि अनिरुद्ध उमट के (तीसरे, अप्रकाशित) उपन्यास ‘स्वर्ग के द्वार पर लाल चींटियाँ’ का अंश

Extract from fiction writer and poet Aniruddh Umath’s (third, unpublished) Hindi novel ‘Swarg Ke Dwar Par Laal Chintiyaan’



The Empty Space: Geetanjali Shree

कथा / Fiction

Excerpts from Geetanjali Shree’s novel “Khaali Jagah”, translated into English by Sara Rai.

गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘खाली जगह’ का अंश, अंग्रेज़ी अनुवाद सारा राय.



स्त्री-बिजूका:गिरिराज किराडू

कथेतर / Non-Fiction

हिन्दी के साहित्यिक पर्यावरण में स्त्री-लेखक की जगह को, स्थान-रूपकों में पढ़ता हुआ एक विमर्श

A discourse that tries to read the ‘space’ for a woman writer in Hindi literary environment in place-metaphors.



Tove Olga Aurora / टूवे ओल्गा ऑरोरा: Lars Lundkvist / लार्श लुण्डक्विस्ट

कविता / Poetry

3 sections from the Swedish poet Lars Lundkvist’s long poem “Tove Olga Aurora” in English and Hindi translation – by Teji Grover & Birgitta Wallin.

स्वीड़ी कवि लार्श लुण्डक्विस्ट के शोकगीत ‘टुवे ओल्गा ऑरोरा’ के तीन अंश हिन्दी एवं अंग्रेज़ी मे. अनुवाद : तेजी ग्रोवर एवं बिर्गित्ता वॉलिन.



January 4, 1960: Udayan Vajpeyi

कविता / Poetry

5 Prose Poems by Udayan Vajpeyi, in the original Hindi, and translated into English by Rahul Soni.

उदयन वाजपेयी की पांच कवितायें, राहुल सोनी द्वारा अंग्रेज़ी अनुवाद में, मूल हिन्दी के साथ