आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

देशज आधुनिकता का जन्म / The Birth of Indian Modernity

पुरूषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक अकथ कहानी प्रेम की कबीर के कालखंड को देशज आधुनिकता के उदय होने के समय की तरह स्थापित करती है. इस पुस्तक पर विनोद शाही और राजेन्द्र पॉण्डेय की समीक्षाएँ और मीरां की कविता का एक नया पाठ करता हुआ माधव हाडा का लेख मिलकर इस खंड को पूरा करते हैं.
Purushottam Agrawal’s book Akath Kahani Prem Ki establishes Kabir’s period as the time of the birth of Indian modernity. This feature comprises readings of the book by Vinod Shahi and Rajendra Pandey, as well as a new reading of Mira’s poetry by Madhav Hada.

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औपनिवेशिक आधुनिकता के बरक़्स कबीर: विनोद शाही

कबीर काव्य – संवेदना का ‘महावृत्तान्त’: राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय

मीरा की कविता का पुनर्पाठ: माधव हाड़ा

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