आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

एक पापमोचक की आँख से / The Mind’s A Boat And All That

इस अंक के साथ प्रतिलिपि का स्केंडिनेवियाई कनेक्शन और मज़बूत हुआ है जिसका एक प्रमाण इस फीचर में डेनिश गल्प की उपस्थिति है. यह हमारे लिए खुशी की बात है कि रूबेन पाल्मा और बेन क्यू होम और मेरेटे पर्दिस हेले जैसे जाने माने उपन्यासकारों का काम हम प्रकाशित कर रहे हैं.

मंटो के अनुवाद हमने पहले भी प्रकाशित किये हैं लकिन इस अंक की उपलब्धि है हिंदी के भूले बिसरे उपन्यासकार  शिवपूजन सहाय का अंग्रेजी में उपलब्ध होना और गुजराती मूल के अनूठे तमिल कथाकार दिलीप कुमार की कहानी.

चारु निवेदिता के प्रयोगशील और विवादास्पद उपन्यास जीरो डिग्री के अंशों का प्रभात रंजन का बेजोड़ अनुवाद; बांग्ला कथाकार नकुल मलिक की कहानी का उत्पल बनर्जी कृत हिंदी अनुवाद और नीटू दास के अंग्रेज़ी अनुवाद में युवा असमिया लेखक जयंत सैकिया की कहानी भी इस फीचर में शामिल है.

With this issue Pratilipi strengthens its Scandinavian connection even further, as is evident in the selection of Danish fiction – by noted novelists Ruben Palma, Benn Q. Holm and Merete Pryds Helle – in this feature.

This feature also has another story by Manto, although the most satisfying thing about the feature is the inclusion of stories, in English translation, by the near forgotten Hindi writer Shivpujan Sahay and by the remarkable Dilip Kumar, a Tamil writer of Gujarati origin.

Rounding out the feature are: an excerpt from Charu Nivedita’s experimental and controversial novel Zero Degree in Prabhat Ranjan’s fascinating Hindi rendition; Nakul Mullik’s Bengali short story in Utpal Banerjee’s Hindi translation; and Nitoo Das’s English translation of the upcoming Assamese writer, Jayanta Saikia.

Click to Read

Sahay: Saadat Hasan Manto

Plot for a Story: Shivpujan Sahay

The Return of Roy Jackson: Ruben Palma

Down and Out: Benn Q. Holm

The Mind’s A Boat And All That…: Dilip Kumar

Capri 27.7.1997: Merete Pryds Helle

जीरो डिग्रीः चारू निवेदिता

विसर्जन: नकुल मल्लिक

Seedling Solace: Jayanta Saikia

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  1. तमिल का कोई हिंदीभाषी अनुवादक आपको मिल सकता था, ज़ीरो डिग्री के लिए।

    शायद नहीं।

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एक पापमोचक की आँख से / The Mind’s A Boat And All That

इस अंक के साथ प्रतिलिपि का स्केंडिनेवियाई कनेक्शन और मज़बूत हुआ है जिसका एक प्रमाण इस फीचर में डेनिश गल्प की उपस्थिति है. यह हमारे लिए खुशी की बात है कि रूबेन पाल्मा और बेन क्यू होम और मेरेटे पर्दिस हेले जैसे जाने माने उपन्यासकारों का काम हम प्रकाशित कर रहे हैं.

मंटो के अनुवाद हमने पहले भी प्रकाशित किये हैं लकिन इस अंक की उपलब्धि है हिंदी के भूले बिसरे उपन्यासकार  शिवपूजन सहाय का अंग्रेजी में उपलब्ध होना और गुजराती मूल के अनूठे तमिल कथाकार दिलीप कुमार की कहानी.

चारु निवेदिता के प्रयोगशील और विवादास्पद उपन्यास जीरो डिग्री के अंशों का प्रभात रंजन का बेजोड़ अनुवाद; बांग्ला कथाकार नकुल मलिक की कहानी का उत्पल बनर्जी कृत हिंदी अनुवाद और नीटू दास के अंग्रेज़ी अनुवाद में युवा असमिया लेखक जयंत सैकिया की कहानी भी इस फीचर में शामिल है.

With this issue Pratilipi strengthens its Scandinavian connection even further, as is evident in the selection of Danish fiction – by noted novelists Ruben Palma, Benn Q. Holm and Merete Pryds Helle – in this feature.

This feature also has another story by Manto, although the most satisfying thing about the feature is the inclusion of stories, in English translation, by the near forgotten Hindi writer Shivpujan Sahay and by the remarkable Dilip Kumar, a Tamil writer of Gujarati origin.

Rounding out the feature are: an excerpt from Charu Nivedita’s experimental and controversial novel Zero Degree in Prabhat Ranjan’s fascinating Hindi rendition; Nakul Mullik’s Bengali short story in Utpal Banerjee’s Hindi translation; and Nitoo Das’s English translation of the upcoming Assamese writer, Jayanta Saikia.

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Sahay: Saadat Hasan Manto

Plot for a Story: Shivpujan Sahay

The Return of Roy Jackson: Ruben Palma

Down and Out: Benn Q. Holm

The Mind’s A Boat And All That…: Dilip Kumar

Capri 27.7.1997: Merete Pryds Helle

जीरो डिग्रीः चारू निवेदिता

विसर्जन: नकुल मल्लिक

Seedling Solace: Jayanta Saikia

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  1. तमिल का कोई हिंदीभाषी अनुवादक आपको मिल सकता था, ज़ीरो डिग्री के लिए।

    शायद नहीं।

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