आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

ओपन डिबेट: Open Debate

Art : Sunita

उड़िया, भारतीय और तुलनात्मक साहित्य के विश्व के अग्रणी स्कॉलर प्रोफेसर सत्य पी. मोहंती का रश्मि दुबे भटनागर और राजेंदर कौर द्वारा लिया गया यह साक्षात्कार मूल अंग्रेजी समेत हिंदी अनुवाद में इस बार खुली बहस के लिए प्रस्तुत है. सांस्कृतिक शाविनिज्म का मुकाबला करने में साहित्य की भूमिका पर बल देता हुआ यह पाठ फकीर मोहन सेनापति के उपन्यास ‘छह माड़ आठ गुंठ‘ के बारे में, गैर-यूरोपीय साहित्य के कैनानैजेशन के बारे में, दार्शनिक अवधारणाओं और उनके साहित्यिक व्यवहारों के बारे में, ‘विश्व साहित्य’ की एक नयी ‘विऔपनिवेशीकृत, अधिक समतामूलक अवधारणा’ के बारे में और यूरोपीय आधुनिकता के बरक्स वैकल्पिक देशज आधुनिकताओं के बारे में गहन अंतर्दृष्टि से बात करता है. भारतीय भाषाओँ में साहित्य को मुख्यतः राष्ट्रवादी वाग्जाल में परिभाषित किये जाने की संकीर्णता को निरंतर चुनौती देते हुए इस आलेख पर प्रतिक्रियाएं आमंत्रित हैं.

Our text for open debate in this issue is Rashmi Dube Bhatnagar and Rajender Kaur’s interview with Prof. Satya P. Mohanty, among theworld’s leading scholars of Oriya, Indian and comparative literature. Published here in Hindi translation along with the original English, the interview discusses literature’s role in combating cultural chauvinism while also speaking with great insight about Fakir Mohan Senapati’s novel Chha Maana Atha Guntha (Six Acres and a Third), about the canonization of Asian and African literatures, about alternative modernities and about a ‘genuinely decolonized and egalitarian’ idea of ‘world literature’.

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सांस्कृतिक उग्रभक्ति और साहित्यः सत्य पी. मोहंती

Literature to Combat Cultural Chauvinism

 

 

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ओपन डिबेट: Open Debate

Art : Sunita

उड़िया, भारतीय और तुलनात्मक साहित्य के विश्व के अग्रणी स्कॉलर प्रोफेसर सत्य पी. मोहंती का रश्मि दुबे भटनागर और राजेंदर कौर द्वारा लिया गया यह साक्षात्कार मूल अंग्रेजी समेत हिंदी अनुवाद में इस बार खुली बहस के लिए प्रस्तुत है. सांस्कृतिक शाविनिज्म का मुकाबला करने में साहित्य की भूमिका पर बल देता हुआ यह पाठ फकीर मोहन सेनापति के उपन्यास ‘छह माड़ आठ गुंठ‘ के बारे में, गैर-यूरोपीय साहित्य के कैनानैजेशन के बारे में, दार्शनिक अवधारणाओं और उनके साहित्यिक व्यवहारों के बारे में, ‘विश्व साहित्य’ की एक नयी ‘विऔपनिवेशीकृत, अधिक समतामूलक अवधारणा’ के बारे में और यूरोपीय आधुनिकता के बरक्स वैकल्पिक देशज आधुनिकताओं के बारे में गहन अंतर्दृष्टि से बात करता है. भारतीय भाषाओँ में साहित्य को मुख्यतः राष्ट्रवादी वाग्जाल में परिभाषित किये जाने की संकीर्णता को निरंतर चुनौती देते हुए इस आलेख पर प्रतिक्रियाएं आमंत्रित हैं.

Our text for open debate in this issue is Rashmi Dube Bhatnagar and Rajender Kaur’s interview with Prof. Satya P. Mohanty, among theworld’s leading scholars of Oriya, Indian and comparative literature. Published here in Hindi translation along with the original English, the interview discusses literature’s role in combating cultural chauvinism while also speaking with great insight about Fakir Mohan Senapati’s novel Chha Maana Atha Guntha (Six Acres and a Third), about the canonization of Asian and African literatures, about alternative modernities and about a ‘genuinely decolonized and egalitarian’ idea of ‘world literature’.

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सांस्कृतिक उग्रभक्ति और साहित्यः सत्य पी. मोहंती

Literature to Combat Cultural Chauvinism

 

 

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