आज़ादी विशेषांक / Freedom Special

अंक 13 / Issue 13

कथेतर / Non-Fiction

सांस्कृतिक उग्रभक्ति और साहित्यः सत्य पी. मोहंती

कथेतर / Non-Fiction

प्रो. सत्य पी. मोहंती से रश्मि दुबे भटनागर और राजेन्द्र कौर की बातचीत मूल अंग्रेजी से अनुवाद: राजशेखर पाण्डेय  यह साक्षात्कार अक्टूबर-नवंबर २०११में लिया गया था. दोनों साक्षात्कारकर्ता अमेरिकी विश्विद्यालयों में साहित्य के अध्यापन से जुडी हुई हैं : रश्मि भटनागर पित्त्सबर्ग विश्विद्यालय के मानविकी केन्द्र में विजिटिंग फेलो हैं तथा राजेंदर कौर साऊथ एशियन […]



Freedom is a Slippery Fish (An Introduction to the Lead Feature): Trisha Gupta

कथेतर / Non-Fiction

Freedom is one of those words. As the cornerstone of our conception of democracy and of modernity itself – or simply as the easiest answer to what so many of us think we aspire to in our political and personal lives – we ought to know exactly what we mean by it. But freedom is […]



काव्य रहस्य और सौंदर्य के भयावह फूल: ‘टूटी हुर्इ बिखरी हुर्इ” का एक स्त्रीवादी पाठ – सविता सिंह

कथेतर / Non-Fiction

कभी-कभी कुछ बातें कहनी ही पड़ती हैं चाहे वह कितनी ही कठिन हों. और कहने की मुश्किल किसी तरह से कम नहीं होती बात कह देने से, क्योंकि जो कहा जाना है उसका अस्तित्व ‘कहे जाने में है–‘कैसे कहूँ वो बात जो कहे जाने में ही है! कहने की इस मुश्किल को समझते हुए कुछ […]



एक ‘अकथ’ शब्द की जीवनीः मनीषा पाँडेय

कथेतर / Non-Fiction

ये शब्‍द, बलात्‍कार, मेरी जिंदगी में पहली बार कब आया? मैंने कब जाना कि ठीक-ठीक इसके  मायने क्‍या हैं? ठीक-ठीक याद नहीं. तब मैं शायद कुछ बारह साल की रही होऊंगी. शहर में एक गैंग रेप की घटना हुई थी. अखबार में पहले पन्‍ने पर बड़ी-सी खबर थी. उस दिन मां ने मुझे मेरे उठने-बैठने-चलने […]



Freedom: Umair Muhajir

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Dubai’s memory is the memory of other places.  Hardly anyone is from the city (and those who are hardly meet those of us who aren’t), one simply lives in it, and because of the passports and visas that say who we are and keep us tied to mother countries we only saw during summer vacations […]



Freedom Posts : Sumana Roy

कथेतर / Non-Fiction

On Facebook, we are all freedom fighters. * Rare is a woman who likes wearing bras. At university, where professors behaved like the patrol police in making sure that we got the various discourses on “Home”, sociological theories having turned Post-colonial literature into a version of Home Science, I revolted in my own private way […]



Here and Hereafter: Nikhil Govind

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Within a certain narrative history, freedom meant domestic stability. It meant the freedom to feel and achieve a security stable enough to forge one’s destiny. In the optimistic nineteenth century, the high noon of European power, the novel of achieved stability was represented by works like Charles Dickens’ David Copperfield. The novel is about the belief […]



राग सुहा (आत्मकथा-अंश): गंगूबाई हंगल

कथेतर / Non-Fiction

अनुवाद: मृत्युंजय मुम्बई और एच.एम.वी. के मेरे संगीत-कार्यक्रमों ने मेरा तआर्रुफ़ आकाशवाणी (१३) से करवाया, जिसका दफ्तर तब बल्लार्ड पिएर में था. आकाशवाणी, मुम्बई के एक अफसर श्री ढोलेकर ने मुझे ‘स्वर-परीक्षा’ (१४) देने का सुझाव दिया. एच.एम.वी. के रूपजी ‘स्वर-परीक्षा’ में मुझे बैठाने के खिलाफ़ थे. एक बार रूपजी ने मुम्बई के बाहरी इलाके […]



कमाटीपुरा की अम्मा (पुस्तक-अंश): एस. हुसैन जैदी

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अंग्रेजी से अनुवाद: प्रभात रंजन एक वेश्या का जन्म उसे जबरदस्ती लाल, दुल्हन का जोड़ा पहना कर एक बिस्तर पर बिठाया गया जिसके ऊपर खूब सारी गुलाब की पंखुडियां बिखरी हुई थीं. उसके होंठों को सुर्ख लाल रंग से रंग दिया गया था और एक बड़ी सी नथ उसके नाक से लटक रही थी, जो […]



लोकप्रियता और राग दरबारी: अमितेश कुमार

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राग दरबारी पर कुछ लिखने का प्रस्ताव मिलने से हुए अनुभव को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. प्रस्ताव पर स्वीकृति की मुहर लगाने के बाद समस्या यह थी कि लिखने का विषय क्या हो? बहुत सारे विषय एक एक कर दिमाग में धक्कम पेल करने लगे. ‘घास खोदने’ की पद्धति का अनुसरण करते […]