प्रतिरोध और साहित्य: मदन सोनी
शीर्ष कथा / Lead Featureहिन्दी साहित्य के विशेष परिप्रेक्ष्य में ‘प्रतिरोध’ को एक मूल्य और अवधारणा के रूप में, साहित्य के साथ उसके रिश्ते के फलन में पढ़ता और समस्याग्रस्त करता यह पाठ मानववाद और उसके समसूत्री विमर्शों की मनुष्य-केन्द्रिकता और ‘नस्लवाद’ को भी चिन्हित करता है.
By problematizing ‘resistance’ as a value and an ideology, and its correspondences with literature, particularly Hindi literature, Madan Soni’s text identifies the homocentricism and ‘racism’ of humanism and the discourses homogeneous to it.
