गल्प विशेषांक / Fiction Special

नवम्बर २०११ / November 2011

To Know What Is Love/प्रेम क्या है जानने के लिए: Oscar Pujol/आस्कार पुजोल

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[1]

प्रेम क्या है जानने के लिए
प्यार करना काफ़ी नहीं है।
ज्ञान क्या है जानने के लिए
जानना काफ़ी नहीं है।
प्रकाश को जानने के लिए
देखना काफ़ी नहीं है।

दूसरी ओर जाना ज़रूरी है
जहाँ बनी-बनाई चीज़ें रहती हैं
उन्हें एक चुंबन देकर जगाना चाहिए
उलटा देखने के लिए
नींद से भरे उठते हुए।
यह काम दोबारा,
इस कार्य को दोबारा करना,
जो हो चुका उसे बिना बिगाड़े।

नफ़रत से प्रेम न करना प्रेम नहीं है

न ही अज्ञान की उपेक्षा करना ज्ञान।
अंधेरे की तरफ़ आंख बंद करने से
रौशनी नहीं दिखती।

[3]

एक मैं-मैं है और एक मैं-तू
और एक मैं-वो और एक मै-हम।
मैं-तू हमेशा दिखता है
दूसरे की निरंतरता में।
मैं-वो पूरा उसे ही जीता है
उस दूर स्थित दूसरे के लिए।
मै-हम हमें देता है
हमीं को
एक अजीब प्रतिध्वनि की तरह
जो बार-बार होती है
घाटी के आईने में
जहाँ सिर्फ़ खिलता है एक
नाम लिए अकेलापन।

मैं-मैं आता है जाता है
हमेशा, हमेशा
अपने-आप से भागते हुए
अपनी तरफ़ ही
एक पलायन के दोलन में।
एक नहीं-मैं भी होता है
और एक बाग
सर्वनामों के बग़ैर।

नहीं होना है
या, क्या नहीं होना नहीं है?

[19]

पागल वो कवि
जो प्यार को फांसना चाहता है
शब्दों के जाल में।
बाद में पता चलता है उसे
कि शब्द प्यार हैं
और वो फंसा हुआ है
सबसे भयानक कारागार में:
मनोहर आज़ादी
बाध्य न करने वाले प्यार की।

[भरतवाक्य]

होना या न होना,
पर हमेशा होना।
अगर तेरे मेरे बीच नहीं होती यह
दूरी
तो कहाँ लिखता मैं अपनी कविता?

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2 comments
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  1. सुन्दर कविता.

  2. सुन्दर कविता
    Nice thoughtfull world. Love can not be explained by words.

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